Sunday, October 4, 2009
मै प्रतिभा राय, आज से ब्लॉग पर अपनी एक नई दुनियां बना रही हूं....नाम दिया है आओ जी ले जरा ! आज की भागती -दौड़ती ज़िदगी में किसे फुर्सत है किसी की सुनने और सुनाने की....बस सब भागे जा रहे हैं...कुछ पाने की आशा में..और खोते जा रहे हैं...सुकून के दो पल....हमारे आपके पास साझा करने के लिए काफी कुछ है..इसलिए ऐसा नही है कि आज भी जीने के लिए हमारे पास कुछ नहीं है...बस ज़रुरत है दो पल ठहर कर सोचने और सुस्ताने का...जहां आपको तमाम ऐसी बाते याद आऐंगी जो एक बार फिर से रिफ्रेश कर देंगी....तो इंतज़ार किस बात का आओ जी ले ज़रा
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प्रतीभा जी,
ReplyDeleteआपकी शुरुआत ही बेहद खूबसूरत और दिल को छू ले वाली है। उम्मीद है हमें आपकी कलम से जीवन के सत्य को जानने का मौका मिलेगा कि आखिर वो क्या है? जो भागती-दौड़ती जिन्दगी को पल भर का विराम दे सके। पर चलना ही जिन्दगी है और पड़ाव मौत। आप अपनी मंजिल हासिल करें पड़ाव नहीं।
अनिता सिन्हा